Hastmaithun Se Kon Kon Se Sex Rog Hote Hai

Hastmaithun Se Kon Kon Se Sex Rog Hote Hai

हस्तमैथुन से कौन-कौन से सेक्स रोग होते हैं

(Treatment of Sex Diseases with Masturbation)

हस्तमैथुन(Masturbation)
हस्तमैथुन क्या है?

हस्तमैथुन उस आप्राकृतिक क्रिया को कहते हैं, जिसमें स्त्री और पुरूष खासकर युवा वर्ग जब उत्तेजित होते हैं या उनके मन में तीव्र संभोग की इच्छा जागृत हो रही हो और इस अवस्था में उनके पास अपनी काम-पिपास शांत करने का कोई साधन या फिर स्त्री और पुरूष के रूप में कोई पार्टनर न मिले, तो वे हस्त(हाथ) द्वारा अपने यौनांग व गुप्तांग को सहला कर, वीर्यपात करवाते हैं, जिसके उनकी उत्तेजना शांत हो जाती है। इसे ही हस्तमैथुन करना कहते हैं।
अगर बहुत छोटे और सरल शब्दों में हस्तमैथुन को परिभाषित किया जाये, तो हाथों का इस्तेमाल करके अपने गुप्तांगों को सहला कर, हिला-डुलाकर वीर्य निष्कासित करने को हस्तमैथुन कहते हैं।

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हस्तमैथुन करने के कारण क्या हैं?

साधारणतया बुरी संगत में रहना मस्तिष्क को हर समय यौन एवं दुर्विचारों से भरे रखना, युवा पुरूषों का विवाह न होना तथा पुरूष एवं महिलाओं का अकेले में अधिक रहना, यौनशक्ति में वृद्धि होने पर एकांत में रहना, इस रोगीय दशा के प्रमुख कारण हैं। कुछ लोगों में यह बुरी आदत बचपन से ही हो जाती है। अतः कम आयु में लड़कों के माँ-बाप की लापरवाही से या उचित ज्ञान एवं मार्गदर्शन की कमी से शिश्न की नोंक या सुपारी पर मैल जम जाना या आँत्र कृमि के कारण बच्चे के लिंग को सहलाकर रोने से चुप कराना भी इसी प्रकार के कारणों में से है। इनसे शिश्न में उत्तेजना से संवेदना की अधिकता से यह बुरी आदत पड़ जाये तो जवानी तक रहती है।

लक्षण तथा चिन्ह-

यह यौनक्रिया बहुधा हाथ से कही जाती है, अतः यह हस्तमैथुन कहलाती है। इसके अतिरिक्त अकेले व एकान्तप्रिय व्यक्तियों के हाथों के अतिरिक्त अन्य साधनों से भी पुरूष अपना वीर्य स्खलन दिन व रात में एक या अधिक बार भी कर सकता है। यह बुरी आदत युवतियों में भी पायी जाती है।

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वीर्य के बार-बार स्खलन से सम्पूर्ण शरीर अंगों में दुर्बलता व शक्तिहीनता हो जाती है। मूत्र बार-बार तथा जलन के साथ आने लगता है। शिश्न की जड़ पतली हो जाती है। लिंग एक और को टेढ़ा हो जाता है और सामान्य स्वास्थ्य की दशा में नहीं रह पाता है। खराब द्रवों के एकत्र होने से शिश्न(इन्द्री) की रक्तवाहिनियाँ फूल जाती हैं तथा शिश्न के अत्यधिक संवेदनशील हो जाने से स्वप्नदोष, धातुरोग, पौरूष दौर्बल्य, नपुंसकता जैसे विकार हो जाते हैं। रोगी परेशान तथा दुखी रहता है। सुस्ती तथा आलस्य के कारण किसी भी काम में मन नहीं लगता फिर चाहे घर हो या आफिस। ऐसे लोगों को दूसरों के साथ खास मिलना-जुलना भी पसंद नहीं होता। ऐसा व्यक्ति हर वक्त एकांत की ताक में रहता है, कि किसी तरह एकांत मिले और हस्तमैथुन करके अपनी उत्तेजना को शांत करूं। कब्ज़ की शिकायत रहती है। भूख खुलकर नहीं लगती। इत्यादि कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

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उपचार व्यवस्था-

सर्वप्रथम रोगी की मानसिकता में सुधार लाया जाये। उसको एकांत में छोड़कर सामूहिक जीवन के सिद्धान्त पर लोगों के पास बैठना और मिलना-जुलना तथा बुरी संगत को छोड़ देना चाहिए। इस बुरी आदत को एक बार ही छोड़कर दृढ़ निश्चय कर लें कि फिर कभी इसके बारे में कोई विचार मन में नहीं लाऊँगा। इसके पश्चात् भी स्वप्नदोष, धातु रोग आदि की शिकायत हो तो वही चिकित्सा व्यवस्था करें, जो इन रोगों के उपचार के अन्तर्गत दी गयी हैं।

पथ्य-अपथ्य :

साधारण भोजन, कम मसालेदार तथा कम तेल वाला भोजन दें। चपाती, मूँग, अरहर की दाल, सब्ज़ी, तरकारी, नान-पाव, बिस्कुट, अण्डा आदि दें।
चाय, खट्टी चीजें, शराब तथा अधिक अचार, चटनी, गुड़, तेल आदि से परहेज़ करायें। दूसरे लोगों के संग रहने की आदत बनायें। एकांत में न रहने दें।

हस्तमैथुन के कारण आये सेक्सुअल रोगों का उपचार-

अत्यधिक हस्तमैथुन की लत के कारण पुरूषों को कई प्रकार के सेक्स रोग हो जाते हैं, जिनमें शीघ्रपतन प्रमुख हैं। इसके अलावा स्वप्नदोष, धातु रोग, यहां तक कि गंभीर अवस्था में नपुंसकता भी आ जाती है।
इस हिंदी लेख में बताये जा रहे योग व नुस्खों को इस्तेमाल करने का फायदा या लाभ तभी है, जब रोगी स्वयं दृढ़ इच्छा से इस बुरी आदत को छोड़ने का मन बनाये। और खुद अपने आपसे वायदा करे कि अब भविष्य में हस्तमैथुन के बारे में सोचेगा भी नहीं। जब तक रोगी मानसिक रूप से दृढ़ नहीं होगा कि वह हस्तमैथुन की लत को छोड़ सकता है, तब तक उसकी यह आदत जिंदगी भर नहीं छूट सकती।

हस्तमैथुन की लत से उत्पन्न इन सभी सेक्स रोगों के लिए देसी आयुर्वेदिक नुस्खें नीचे दिये जा रहे हैं..

1. दो ग्राम मुलहठी का चूर्ण, एक तोला शुद्ध घी तथा 6 ग्राम शहद मिलाकर सुबह के समय चाट लें और ऊपर से गाय का धारोष्ण दूध पी लें। इससे हस्तमैैथुन से आई कमजोरी नष्ट होती है और यह योग स्वप्नदोष में भी फायदेमंद है।

2. प्रतिदिन सुबह 3-4 गुलाब के फूल मिश्री के साथ खाकर दूध पीने से हस्तमैथुन की अधिकता से उत्पन्न रोग स्वप्नदोष ठीक हो जाता है।

3. गोखरू, सूखे आँवलें तथा गिलोय समभाग लेकर बारीक पीस लें। दो ग्राम चूर्ण में घी तथा शक्कर मिलाकर खाने से सेक्स रोग नष्ट होते हैं।

4. 6 ग्राम से एक तोला तक बबूल के कोमल पत्ते खाकर ठंडा पानी पीने से स्वप्नदोष दूर होता है।

5. बरगद के वृक्ष की छाल को सुखाकर बारीक पीस लें तथा इसके बराबर मिश्री मिलाकर रख लें। 6 ग्राम दवा सुबह-शाम गाय के दूध के साथ खाने से शीघ्रपतन, स्वप्नदोष आदि रोग मिट जाते हैं।

6. बरगद के कच्चे फलों को छाया में खूब सुखाकर पीस लें। 10 ग्राम दवा सुबह के समय गाय के दूध के साथ लेने से हस्तमैथुन के विकार दूर होते हैं और साथ ही हस्तमैथुन करने की इच्छा का भी धीरे-धीरे दमन होता है।

7. देसी बबूल की कोपलों(नरम पत्ती) को सिल पर भली-भांति पीसकर लुगदी बना लें। लगभग 10 ग्राम लुगदी में उतनी ही (समभाग) मिश्री मिलाकर पुनः सिल पर रगड़ें। इस मिश्रण को धीरे-धीरे चाट लें। ऊपर से एक गिलास ताजा पानी पी लें। 40 दिन तक प्रतिदिन सुबह-शाम इसका सेवन किया जाये तो शारीरिक बल में वृद्धि होती है, स्तम्भन शक्ति बढ़ती है तथा प्रमेह, स्वप्नदोष आदि विकार भी नष्ट होते हैं।

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