Hastmaithun Se Hone Wale Sex Rog Ka Desi Ilaj

Hastmaithun Se Hone Wale Sex Rog Ka Desi Ilaj

हस्तमैथुन से होने वाले सेक्स रोग का देसी इलाज

हस्तमैथुन(Masturbation)

युवा स्त्री-पुरूष द्वारा कामोत्तेजना आने पर स्वयं ही हस्त द्वारा अपनी कामपिपासा को शांत करना यानी वीर्य स्खलित करने को ही हस्तमैथुन कहते हैं। हस्तमैथुन की प्रवृति पुरूषों में अधिक पायी जाती है। जब पुरूष कोई अश्लील दृश्य, मूवी या बातें सोचकर स्त्री प्रसंग के लिए व्याकुल हो जाता है और उसके पास उस समय अपनी उत्तेजना को शांत करने का कोई साधन(स्त्री अथवा पत्नी) उपलब्ध न हो, तो इस दशा में वह मजबूर होकर अपने हाथों से ही स्वयं सेवक बनकर वीर्य निष्कासित कर लेता है, जोकि हस्तमैथुन कहलाता है।
हस्तमैथुन करना यूं तो कोई विशेष गंभीर समस्या नहीं है। बल्कि यह तो युवाओं में बढ़ती उम्र में कारण एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। किन्तु कहते हैं न अति हर चीज की हानिकारक होती है। उसी प्रकार अत्यधिक हस्तमैथुन करने से या फिर इसकी लत पड़ जाने से व्यक्ति को कई प्रकार की सेक्स समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जैसे शीघ्रपतन, स्वप्नदोष यहां तकि कभी-कभी व्यक्ति नपुंसकता का शिकार भी हो जाता है।

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हस्तमैथुन से उत्पन्न व्याधियाँ और उनकी चिकित्सा-

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किशोरावस्था में यौन ग्रन्थियों की परिपक्वता यौन तनाव को जन्म देती है और इसी तनाव से मुक्ति पाने के लिए हस्तमैथुन को सुलभ साधन के रूप में प्रायः सभी किशोर कभी न कभी अपना बैठते हैं।

1. धतूरे के फूल, हरमल, मालकांगनी, लौंग प्रत्येक 20 ग्राम, कुस्त मीठा, नागरमोथा, सरवाली, तुख्मरिहां, संखिया नीला 1 ग्राम। पहले संखिया खरल में डालकर अदरक के रस में चार घंटे तक खरल करें। इसके बाद शेष औषधियां डालकर अच्छी प्रकार खरल करके दो-दो ग्राम की गोलियां बना लें। एक गोली प्रतिदिन रात को खाना खााने के बाद पानी से निगल लें।
जिस व्यक्ति ने निरंतर कई वर्षों तक लगातार अपने हाथों से अपने पट्ठे कमज़ोर किये हों तो उपरोक्त बताई गई इन गोलियों के 4-5 सप्ताह के प्रयोग से तमाम खोयी हुई मर्दाना शक्ति वापिस आ जाती है।
संखिया की हानि अदरक के रस से समाप्त हो जाती है, इसलिए ये गोलियां किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचाती हैं।

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2. शुक्र प्रमेह के साथ यदि स्वप्नदोष भी हो जाये तो निम्न योग दें। ढाक के बीज(पलाश), पलाश पापड़ा और वायबिडंग समान भाग लेकर चूर्ण बना लें। इसे आंवला के रस, शहद और घी मिलाकर पीने से एक मास में वृद्ध पुरूष भी युवा के समान हो जाता है। डेढ़ ग्राम चूर्ण, आंवले का रस 3 मि.ली., शहद 3 ग्राम, गाय का शुद्ध घी 5 ग्राम। यह एक मात्रा है। इसे नित्य सुबह स्नानादि के बाद लें।

3. हस्तमैथुन की आदत छुड़ाने के लिए अस्टीलागो होमियो औषधि बहुत उत्तम है। इसके निरंतर प्रयोग से हस्तमैथुन की आदत छूट जाती है।

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4. हस्तमैथुन के प्रभाव से होने वाली कमजोरी आदि दुष्प्रभावों के लिए तुलसी के बीज और काली मूसली समान भाग लेकर कूट-छान लें। मात्रा 1-2 ग्राम धारोष्ण गो-दुग्ध के साथ सेवन करें। इससे बल वीर्य की वृद्धि भी होती है एवं कामशक्ति बढ़ाने में सहायक एक सरल प्रयोग है।

5. प्याज़ और अदरक का रस प्रत्येक 250 मि.ली., तेल बिनौला 125 मि.ली., दस मुर्गी के अण्डों की जर्दियां, शहद 400 ग्राम। शहद और अण्डों की जर्दी को मिलाकर जोर से रगड़ें। भली-भांति घुल मिल जाने पर तेल सम्मिलित करके फेंटे। तत्पश्चात् प्याज और अदरक के रस को मिलाकर खूब अच्छी तरह फेंटकर धीमी आंच पर पकायें, गाढ़ा हो जाने पर उतार कर रख लें। प्रतिदिन 25 से 50 ग्राम तक सहनशक्ति के अनुसार गौ दूध के साथ प्रयोग करें। कामशक्ति उत्पन्न करने की अत्यधिक प्रभावशाली औषधि है। हस्तमैथुन से पीड़ित व्यक्तियों तथा बूढ़ों के लिए अत्यधिक लाभप्रद है।

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6. मीठे कन्धारी अनार के दाने पृथक करके शेष गूदे व छिलके दो गुणा तिलों का तेल मिलाकर तीन दिन तक धूप में ढक कर रख दें। इसके पश्चात् धीमी आग पर पकायें। गूदा व छिलका जल जाने पर तेल को छानकर रख लें। इसको सुपारी को छोड़कर लिंग पर प्रतिदिन मलें। हस्तमैथुन के कारण लिंग विकृतियां दूर होने के साथ-साथ शीघ्र स्खलन दूर होकर स्तम्भन शक्ति भी बढ़ती है।

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