Hastmaithun Se Hone Wale Sex Rog Ka Desi Ilaj

Hastmaithun Se Hone Wale Sex Rog Ka Desi Ilaj

हस्तमैथुन से होने वाले सेक्स रोग का देसी इलाज

स्त्रियों और पुरूषों का हस्तमैथुन-

(Masturbation)

उचित मैथुन विधि के अतिरिक्त किसी भी अन्य उपाय द्वारा कामोत्तेजना पैदा करके कृत्रिम विधियों द्वारा वीर्यपात करने को हस्तमैथुन या हस्तक्रिया या आत्म दुव्र्यसन(Self abuse or onanism) कहते हैं।
इस क्रिया में स्त्रियां भी पुरूषों से कम नहीं हैं। आरम्भ में हस्त द्वारा युवक-युवतियां इसको आनंद के लिए स्वेच्छापूर्वक करते हैं। युवतियां अंगुलि का प्रयोग करती हैं अथवा लकड़ी या रबड़ों का सीधा लिंग-सा बनाकर या फिर बैंगन या मूली आदि सब्जियों की सहायता से मैथुन करके अपनी काम-पिपासा शांत करती हैं। प्रायः ऐसी युवतियों की योनि फैल जाती है।
बाद में यद्यपि मनुष्य इस कर्म(हस्तमैथुन) से घृणा करने लगता है, फिर भी उत्पादक संस्थान के प्रदाह के कारण उसको विवश होकर इसका दास बनना ही पड़ता है। स्मरण रखें कि उचित रीति से लिंग पर कठोर दबाव पड़े बिना यदि सप्ताह में एक-आध बार(20 वर्ष की आयु के पश्चात्) हस्तमैथुन कर लिया जाये तो यह हानिरहित है। इसी प्रकार युवतियां योनि में कठोर वस्तुओं का प्रयोग न करके मृदु वस्तुओं या भगनासा मर्दन द्वारा यौन सुख सप्ताह में एक-आध बार ले लिया करें तो यह कोई हानिप्रद नहीं है।

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लेकिन जैसे कि कहा जाता है कि अति हर चीज की नुकसानदायक होती है, इसलिए आवश्यकता से अधिक, बार-बार व लगातार हस्तमैथुन करने के परिणाम भी दुष्कर ही साबित होते हैं। जैसे कि पुरूषों में शीघ्रपतन, धात रोग व वीर्य विकार जैसी गुप्त समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं, यहां तक कि किसी-किसी स्त्री-पुरूष में हस्तमैथुन की इच्छा इतनी प्रबल हो जाती है कि उन्हें वास्तविक संभोग में वो आनंद ही प्राप्त नहीं होता, जोकि उन्हें हस्तमैथुन की लत से प्राप्त होती है। इसी कारण पुरूष, स्त्री व पत्नी को हस्त द्वारा लिंग पर घर्षण करके वीर्यपात करने के लिए बाध्य करता है, तो वहीं स्त्रियां भी पत्नी के रूप में यौनसुख प्राप्त करने के उद्देश्य सें पति अथवा पुरूष को अंगुलि के माध्यम से यौन-तृप्ति के लिए निवेदन करती हैं। इसका परिणाम यह निकलता है दोनों ही धीरे-धीरे वास्तविक यानी प्राकृतिक संभोग से वंचित होने लगते हैं और उनकी सेक्स लाईफ पूरी तरह समाप्त हो जाती है।

हस्तमैथुन के सबसे खास कारण-

1. एक से अधिक बच्चों का एक ही बिस्तर पर होना।

2. स्नानगृह या शौचालय में एकत्रित होना।

3. बुरे मित्रों या नौकर-नौकरानियों का साथ मिलना।

4. अश्लील चित्रों अथवा साहित्य को पढ़ना।

5. माता-पिता का बच्चों के सामन निर्लज्ज दाम्पत्य व्यवहार तथा प्रेम-क्रीड़ा का प्रदर्शन आदि।

6. पोर्न व अश्लील फिल्में या वीडियोज़ देखना एकांत में।

हस्तमैथुन के कुप्रभाव-

अत्यधिक हस्तमैथुन से लिंग पतला, टेढ़ा, अविकसित तथा काठिन्यहीन हो जाता है, वीर्य पतला हो जाता है, धीरे-धीरे वीर्य निकल जाने से स्वप्नदोष एवं नपुंसकता की शिकायत पैदा हो जाती है, पुरूष स्त्री समागम के योग्य नहीं रहता, प्रायः कुछ युवक इससे इतने कुंठित हो जाते हैं कि वह अपने आपके स्त्री के योग्य न समझते हुए आत्महत्या तक कर लेते हैं।
वास्तव में यह स्वयं कोई रोग नहीं है, बल्कि एक गलत आदत है, जिसका व्यक्ति पर शारीरिक रूप से तो कम, लेकिन मानसिक रूप से बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। वह अपने आपको हीन समझने लगता है। हमेशा चिन्तनशील रहता है। वहम करता है। स्मरणशक्ति कमज़ोर हो जाती है और इन सबका प्रभाव उसके शरीर पर भी पड़ता है।
हस्तमैथुन की आदत छोड़ देने के बाद प्रायः स्वप्नदोष की शिकायत हो जाती है, जो संभोग के समय शीघ्रपतन में परिवर्तित हो जाता है।

चिकित्सा सूत्र-

जैसे कि ऊपर बतलाया गया है कि हस्तमैथुन कोई रोग नहीं है, बल्कि एक गलत आदत है। अतः इसकी कोई चिकित्सा नहीं है। औषधि चिकित्सा द्वारा हस्तमैथुन की आदत को नहीं छुड़ाया जा सकता है। हां, हस्तमैथुन के कारण कुछ शारीरिक, मानसिक विकार हुए हों, तो उनकी चिकित्सा की जा सकती है।
हस्तमैथुन का रोगी बहुत अधिक घबराया हुआ होता है, चिन्तातुर और भयभीत होता है, अतः सबसे पहले उसे मानसिक चिकित्सा देनी चाहिए। फिर यदि आवश्यक हो तो कुछ औषधियाँ दें।

हस्तमैथुन से उत्पन्न हुए विकारों की देसी चिकित्सा पद्धति-

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1. शक्तिवर्धक एवं स्तम्भक चूर्ण: दालचीनी डेढ़ ग्राम, नौशादर कलमी डेढ़ ग्राम, मिश्री सफेद 6 तोला, कायफल 6 रत्ती, अफीम शुद्ध की हुई 6 रत्ती, केसर शुद्ध 1 रत्ती, शिंगरफ रूमी 1 रत्ती, कस्तूरी शुद्ध आधा रत्ती, माजू सब्ज बिना सुराख 4 रत्ती, रेगमाही 7 रत्ती तथा लौंग 4 रत्ती। नौशादर को गाय के 20 मि.लि. दूध में घोलकर आग पर पका लें। फिर शेष औषधियाँ अत्यंत सूक्ष्म पीसकर नौशादर मिलाकर चार मात्राएं बना लें। एक मात्रा संभोग से दो घंटा पूर्व आधा किलो दूध के साथ खायें। संभोग के पश्चात् दूध पीयें। खोई हुई शक्ति तुरन्त पलट आयेगी। दूध का प्रयोग अत्यधिकता से करते रहें।

2. गोखरू, सूखे आँवलें तथा गिलोय समभाग लेकर महीन पीस लें। दो माशा चूर्ण में घी तथा शक्कर मिलाकर खाने से हस्तमैथुन की कमजोरी समाप्त हो जाती है।

3. 6 माशा से 1 तोला तक बबूल के कोमल पत्ते खाकर ठण्डा पानी पीने से हस्तमैथुन से आई कमजोरी के साथ ही स्वप्नदोष दूर होता है।

4. मुण्डी बूटी 6 ग्राम प्रतिदिन बकरी के पाव भर दूध के साथ खाते रहने से अंग मजबूत होकर बुढ़ापा, शक्तिहीनता एवं निर्बलता दूर होकर शरीर पर लाली आ जाती है। स्नायुतंत्र शक्तिशाली बन जाते हैं। युवावस्था में प्रयोग की जाये तो बुढ़ापा देर से आता है तथा दिल घबराना, दिल की कमज़ोरी, मस्तिष्क की दुर्बलता तथा समस्त वीर्य विकार दूर हो जाते हैं।

5. भंगरा के बीज लेकर समभाग तिल और लाल शक्कर मिलाकर प्रतिदिन खाने से समस्त स्नायु शक्तिशाली हो जाते हैं। समस्त शरीर को शक्ति प्राप्त होती है। अत्यधिक लाभप्रद है और बुढ़ापा आने ही नहीं देता है।

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6. सफेद मूसली का चूर्ण 10 ग्राम, मिश्री 20 ग्राम, पानी 100 मि.ली.। एक मिट्टी के प्याले में रात को भिगो दें। प्रातः निचोड़ कर पी लिया करें। इसके प्रयोगकाल में ब्रह्मचर्य का पालन जरूर करें। एक मास तक इसी प्रकार प्रयोग करते रहने से कामोत्तेजनाहीनता तथा वीर्याल्पता दूर हो जाती है। संभोग शक्ति में वृद्धि होती है तथा 50 वर्ष का प्रौढ़ स्वयं को 20 वर्ष का नवयुवक प्रतीत करने लगता है। इस योग को कम से कम एक बार नित्य प्रयोग करने से वृद्धावस्था तक रति शक्ति समाप्त नहीं होती है।

7. सिम्बल की जड़ का चूर्ण 5 से 10 शहद में मिलाकर खाते रहने से बुढ़ापा नहीं आता है। इसका प्रयोग निरन्तर करते रहना चाहिए। ऐसा करने से आपको इसका चमत्कार सदा जवानी के रूप में देखने को मिलेगा। इसके निरंतर प्रयोग से बाल काले तथा शरीर चुस्त बना रहता है और हस्तमैथुन से उत्पन्न हुए सभी यौन विकारों को दूर करता है।

8. आहार-विहार में संयम बरतने वाले पुरूष की कामशक्ति का पतन लगभग 70 वर्ष की आयु तक नहीं होता।

अन्य चिकित्सा-

10 दिन तक केवल फलाहार पर रहें। इसके बाद रात्रि का भोजन न करे। केवल दिन का भोजन करें। 15 दिन के बाद रात्रि भोजन आरम्भ कर दें, परन्तु इसे सोने से 3 घंटा पूर्व कर लें। एकांत में अकेेले में न रहें।

चूँकि हस्तक्रिया की ओर प्रवृत्ति इतनी उग्र होती है कि इसका दमन असंभव-सा होता है, अतः ऐसा प्रबंध करें कि यह वासना हृदय में जागृत ही न हो। इसके लिए सर्वोत्तम उपाय उत्तम सादक द्रव्यों का प्रयोग है।

सर्वप्रथम सादक द्रव्यों का प्रयोग तथा इसके पश्चात् रसायनौषधियों का प्रयोग उचित है। यही ठीक उपचार है। यदि सचेत होकर इसका पालन किया जाये तो कोई कारण नहीं कि शोचनीय सीमा को प्राप्त नपुंसक की गणना शक्तिशाली महारथियों की श्रेणी में न हो।

हस्तमैथुन-ग्रस्त व्यक्ति को पहले समझा-बुझा कर यह आदत छुड़ायें। तत्पश्चात् इन्हें प्रारम्भ में हर प्रकार के गरम शुष्क एवं उत्तेजक पदार्थों जैसे माँस, अण्डे, चाय, काॅफी, गरम मसाले, गरिष्ठ भोजन तथा वातवर्धक वस्तुओं से परहेज़ कराकर हल्का, सादा सुपाच्य भोजन जैसे तोरई, कद्दू, पालक, शलजम आदि खिलायें।

जब इन्द्रीविकार दूर होकर स्वप्नदोष, वीर्य प्रमेह आदि रोग होकर पाचन क्रिया शक्तिशाली हो जाये, तो शारीरिक दुर्बलता को दूर करने तथा पौरूषशक्ति बढ़ाने के लिए अण्डे, माँस, मछली, घी, दूध, मक्खन, मलाई आदि खिलायें। लेकिन ध्यान रखें कि देर से हज़म होने वाली व खट्टी वस्तुओं से परहेज़ करना जरूरी है।

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