Hastmaithun Se Aayi Kamzori Ka Ilaj

Hastmaithun Se Aayi Kamzori Ka Ilaj

हस्तमैथुन से आई कमज़ोरी का इलाज

हस्तमैथुन(Masturbation)

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मनुष्य शरीर में वीर्य के रूप में एक अद्भुत शक्ति विद्यमान होती है। यदि इस शक्ति का प्रयोग हम सही समय पर सही काम के लिए करें तो हमें मानसिक, शारीरिक व आध्यात्मिक रूप से पूर्ण संतुष्टि मिलती है तथा हमारे व्यक्तित्व का विकास व उन्नति होती है। लेकिन जब इस शक्ति का दुरूपयोग होकर इसका इस्तेमाल व्यर्थ में होने लगे तो इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। कुछ नवयुवक एवं पुरूष क्षणिक सुख के लिए अपने पुरूषांग से अनुचित छेड़छाड़ करके या पुरूषांग को हाथ से रगड़ कर अपना वीर्य बिना किसी मकसद के व्यर्थ में ही बर्बाद करते हैं, जिसके बर्बाद होने से शरीर के सभी अंगों की शक्ति व क्रियाशीलता घटने लगती है। हस्तमैथुन से पुरूषांग की नसें भी कमजोर पड़ने लगती है, जिससे उसका विकास रूक जाता है। क्योंकि पुरूषांग की नसें बहुत ही कोमल व नाज़ुक होती हैं, जो अनावश्यक दबाव व घर्षण से अपनी शक्ति खोकर नीली नसों के रूप में उभर कर चमकने लगती हैं तथा पुरूषांग की त्वचा सिकुड़ जाने से उसमें टेढ़ापन, पतलापन व ढीलापन की विकृति बन जाती है।
अत्यधिक हस्तमैथुन से इन्द्री की घर्षण शक्ति भी कम हो जाती है, जिससे शादी के बाद पुरूष नामर्दी और शीघ्रपतन का रोगी बन जाता है और स्त्री को पूरी तरह से संतुष्ट करने में असमर्थ रहकर स्त्री से सारी उम्र लज्जित व दबा हुआ रहता है। आज दुनियां में जटिल से जटिल रोगों की चिकित्सा मौजूद है और फिर हस्तमैथुन से पैदा हुई शिकायतें भी कोई लाइलाज नहीं हैं। इसलिए सर्वप्रथम दृढ़ संकल्पित होकर स्वयं से वायदा करें और हस्तमैथुन की बुरी आदत को छोड़ दें। अच्छी बातें सोचें, अच्छी संगत रखें, अच्छा शुद्ध सुनें व देखें, ताकि आपका मन वासना से दूर रह सके।

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हस्तमैथुन के कारण-

1. एकांत में रहना।
2. बुरे विचार।
3. स्त्री के सुकोमल निर्वस्त्र अंगों के चित्र देखना।
4. बुरी संगत या बुरे साथी की संगत में रहना।
5. हर वक्त स्त्री के नग्न अंगों की कल्पना करते रहना।
6. अश्लील साहित्य पढ़ना व पोर्न देखना।
7. बेट के बल लेटना।
8. हर वक्त शिश्न को खुजाने की आदत।
9. लड़कियों व स्त्रियों की संगति में अधिक रहना।
10. गरम चीजों का अधिक सेवन करना। इत्यादि कारण हो सकते हैं।

हस्तमैथुन के लक्षण-

रोगी हताश, साहसहीन, उदास, कार्य से घृणा करने वाला, चिड़चिड़ा और डरपोक हो जाता है। कब्ज़, खून की कमी, पाचन विकार, याददाश्त की कमी, शारीरिक कमजोरी आदि रोग हो जाते हैं।

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परिणाम-

इस घृणित आदत से स्वप्नदोष, धात रोग, शीघ्रपतन, इन्द्री का शिथिल होना, लिंग छोटा, टेढ़ा व कमजोर होना आदि बुरे परिणाम सामने उभर कर आते हैं। यहां तक कि धीरे-धीरे पुरूष, नापुरूष बन जाता है। यानी अत्यधिक हस्तमैथुन करने से नपुंसकता के लक्षण भी उभरने लगते हैं और पुरूष का वैवाहिक जीवन खतरे में पड़ जाता है।

हस्तमैथुन की लत से आई मर्दाना कमजोरी का उपचार-

Hastmaithun Se Aayi Kamzori Ka Ilaj

1. मीठी निर्बसी, लौंग, पान की जड़, शतावरी, शुद्ध शिलाजीत, सफेद मूसली, सालब मिश्री, सफेद प्याज के बीज, उटंगन के बीज, चिड़े का मस्तिष्क प्रत्येक 6 ग्राम, शुद्ध कुचला, विशुद्ध केसर, लौह भस्म, चांदी भस्म प्रत्येक 3 ग्राम, कस्तूरी, अफीम प्रत्येक आधा ग्राम। सब दवाओं को मैदा के समान बारीक खरल करके मुर्गी के अण्डे की जर्दी मिलाकर भली-भांति घोंटकर काली मिर्च के बराबर गोलियां बना लें। प्रतिदिन रात को सोते समय या सायं 2 से 4 गोलियां 375 मि.ली. गाय के दूध के साथ जिसमें मुर्गी के अण्डे की जर्दी और शहद 36 ग्राम मिलाकर भली प्रकार फेंट लिया गया हो, पिलायें।
गुण- मर्दाना शक्ति उत्पन्न करना और गई गुजरी जवानी और शक्ति को वापस लाना इन गोलियों का विशेष चमत्कार है। इसके अतिरिक्त ये गोलियां स्नायु दुर्बलता को दूर करती हैं और स्तम्भन शक्ति उत्पन्न करती हैं। हस्तमैथुन करने वाले नपुंसकों के लिए बहुत ही लाभप्रद हैं।

2. लौह भस्म सौपुटी 6 ग्राम, सफेद संखिया 1 ग्राम, शुद्ध कुचला 3 ग्राम, सफेद कत्था 12 तोला। सबको 6 घण्टे तक जोर से खरल करें और मधु में घोंटकर 125 मि.ग्रा. की गोलियां बना लें। 1-1 गोली भोजनोपरांत दोनों समय खिलायें। ये गोलियां जबर्दस्त मर्दाना शक्ति उत्पन्न करती है और हस्तमैथुन के लिए लाभप्रद हैं।

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3. कबाबचीनी, अजवायन खुरासानी, जटामांसी, तज, कौंच के बीजों की गिरी, दालचीनी, मस्तगी, छड़ेला प्रत्येक 4 ग्राम, मीठी इन्द्रजौ, जायफल प्रत्येक 6 ग्राम, सालब मिश्री 9 ग्राम, खसखस के डोडे 10 ग्राम, काला दाना 20 दानें, लाल तोदरी, पीली तोदरी, लाह बहमन, सफेद बहमन, भंग के पत्ते, सफेद मूसली, काली मूसली प्रत्येक 3 ग्राम। सबको कूट-छानकर शहद 36 ग्राम में मिलाकर केसर 4 ग्राम, कस्तूरी 375 मि.ग्रा. को अर्क बेदमुश्क में घोंटकर बाकी दवाओं में मिलायें। यह दवा 6 ग्राम की मात्रा में प्रातः 375 ग्राम गाय के दूध के साथ खिलायें। बाद में दूध में मधु 24 ग्राम मिला दिया करें।

4. जायफल, लौंग, जावित्री, मीठे इन्द्रजौ, सौंठ, कौंच के बीजों की गिरी, मस्तगी, औद, लाल बहमन, सफेद बहमन, पीली तोदरी, लाल तोदरी, सफेद मूसली, काली मूसली, शलजम के बीज, प्याज के बीज, दालचीनी, पान की जड़, तालमखाना के बीज, पीपल, गाजर के बीज, सालब मिश्री, शतावरी, छोटी इलायची के बीज, सूखा पोदीना, तबासीर, छोटा गोखरू प्रत्येक 4 ग्राम। सबको कूट छान लें। चिरौंजी की गिरी, छिली हुई नारियल की गिरी, मीठे बादामों की गिरी बिना छिलका, पिस्ते की गिरी, अखरोट की गिरी, खरबूजे के बीजों की गिरी, छुहारा प्रत्येक 6 ग्राम। सबको पीसकर मधु 250 ग्राम तथा 250 ग्राम खाँड की चाश्नी तैयार करके उपरोक्त तमाम दवायें मिलायें। उसके पश्चात् केसर 3 ग्राम को गुलाब जल में घोंट कर और 50 चांदी के वर्क मिलाकर पाक बना लें। 6 से 12 ग्राम तक यह दवा गाय के दूध के साथ खिलायें। यह दवा मर्दाना शक्ति को बढ़ाने और उत्तेजना देने वाली हृदय, मस्तिष्क और यकृत को शक्ति देने वाली, स्नायु को पुष्ट करने वाली और वीर्य उत्पन्न करने वाली है।

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