Hastmaithun Ki Kamzori Ka Ilaj

Hastmaithun Ki Kamzori Ka Ilaj

हस्तमैथुन की कमज़ोरी का इलाज

हस्तमैथुन(Masturbation)

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एकांत में कामेच्छा जागने पर जब स्त्री व पत्नी पास में न हो, तो इस स्थिति में अपनी काम-पिपास को शांत करने के लिए व्यक्ति हाथों से अपने गुप्तांग को सहला कर व घर्षण द्वारा वीर्य स्खलित कर लेता है। इसी को हस्तमैथुन कहते हैं। इसी प्रकार अविवाहित स्त्रियां भी अति कामुक होने पर अंगुलि द्वारा योनि मार्ग पर घर्षण कर अपनी काम-पिपासा को शांत कर लेती हैं। यहां हम हर पुरूष या हर स्त्री के विषय में ऐसा नहीं कह रहे हैं। किन्तु लगभग 100 में से 98 प्रतिशत स्त्री व पुरूष ने अपनी जिंदगी में कभी-न-कभी हस्तमैथुन किया होता है अथवा कोई भी अप्राकृतिक उपाय द्वारा वीर्य नष्ट किया होता है।

Hastmaithun Ki Kamzori Ka Ilaj

हस्तमैथुन करना बहुत बुरी आदत है, जिसे व्यक्ति गलत संगति के कारण ना चाहते हुए भी पाल लेता है। बहुत से युवक व युवतियां तो जीवन पर्यन्त तक या फिर लंबे अंतराल तक हस्तमैथुन करते रहते हैं। यह उनकी दिनचर्या में शामिल हो जाता है। यूं तो हस्तमैथुन की बुरी लत युवावस्था में पड़ती है, मगर कई लड़के 8-10 वर्ष की आयु में ही हस्तमैथुन करने लगते हैं। विवाह के बाद वैसे तो हस्तमैथुन की आदत पर विराम लग जाता है, किन्तु फिर भी कुछ युवक ऐसे होते हैं, जिन्हें विवाह के बाद भी हस्तमैथुन में ही ज्यादा आनंद आता है। यहां तक कि वे अपनी विवाहित पार्टनर को भी हस्तक्रिया द्वारा उनका वीर्यपात करवाने के लिए बाध्य करते रहते हैं। उन्हें प्राकृतिक संभोग में कोई विशेष रूचि नहीं रह जाती है। यह वाकई एक गंभीर समस्या का रूप ले सकती है। विवाहित जीवन की खुशियों में ग्रहण लगा सकती है।

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अत्यधिक हस्तमैथुन करने से कई प्रकार की से सेक्स बाधाएं भी उत्पन्न होने लगती हैं, जैसे शीघ्रपतन, स्वप्नदोष, लिंग विकार आदि। यहां तक कि धीरे-धीरे वीर्य विकार उत्पन्न होकर व्यक्ति नामर्दी का शिकार भी हो सकता है। इसलिए हस्तमैथुन की आदत पर जल्दी से विराम लगाने की कोशिश करें।

इसके अलावा हस्तमैथुन की लत वाले व्यक्ति को एकांत का अवसर ही नहीं देना चाहिए। या फिर उसे स्वयं ही एकांत से दूर रहना चाहिए। एक कहावत है न ‘खाली दिमाग, शैतान का घर’। एकांत मिलते ही कामुक प्रवृति के व्यक्ति का दिमाग वासनामयी हो जाता है। वह स्वयं में ही जबरन किसी सुंदर स्त्री व लड़की के निर्वस्त्र अंगों की कल्पना करते हुए काल्पनिक संभोग करने लगता है और हस्तमैथुन करने में जुट जाता है। इसी क्रम में वीर्यपात होने के बाद ही वह शांत होता है और फिर आत्मगिलानि महसूस करने लगता है। फिर स्वयं ही अपने आपसे वायदा करता है कि अब दोबारा यह घृणित कार्य नहीं करेगा, किन्तु पुनः एकांत मिलने पर या कामवासना जागने पर एकांत की खोज कर व्यक्ति दोबारा हस्तमैथुन कर लेता है। यह स्थिति व्यक्ति को अंदर तक खोखला कर देती है। आत्मविश्वास की कमी, खुद के प्रति घृणा, मानसिक विकार जैसी समस्याओं से व्यक्ति घिर जाता है।

हस्तमैथुन से उत्पन्न हुए गुप्त रोगों का देसी उपचार-

Hastmaithun Ki Kamzori Ka Ilaj

1. कौंच के बीज 3 ग्राम, तालमखान 3 ग्राम गाय के ताजा दूध में खांड मिलाकर सेवन करने से हस्तमैथुन से आयी सेक्स कमजोरी समाप्त हो जाती है।

2. हरे करेले के रस में हरमल 50 ग्राम को तर व खुश्क करें, फिर चूर्ण बनाकर रख लें। 1 ग्राम प्रतिदिन प्रयोग करने से हस्तमैथुन की लत से उत्पन्न हुई शीघ्रपतन की समस्या दूर हो जाती है।

3. इमली के बीजों की गिरी कूट-पीसकर रख लें। 3-3 ग्राम की मात्रा में इसे फांक कर ऊपर से गर्म दूध पी लिया करें। शीघ्रपतन दूर होगा।

4. तालमखाना, मूसली सफेद, मूसली काली, कौंच के बीज, ऊटंगन के बीज, मोचरस, ऊंटकारा की जड़, बीजबन्द, तेजबल, बहुफली, साठी के चावल, कमरकस, काहू के बीज, इन्द्र जौ, समुन्द्रसोख, शतावर प्रत्येक 6 ग्राम। सिंघाड़े का आटा 9 ग्राम, सरबाली 10 ग्राम, खांड सबके बराबर। कूट-पीसकर छान लें। इसमें से 6 ग्राम पानी के साथ अथवा बकरी के दूध की लस्सी के साथ सेवन करें। यह योग शीघ्रपतन एवं वीर्य प्रमेह के लिए अनुभूत है।

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5. सरसों के बीज, बीजबन्द, ढाक के बीज। बराबर मात्रा में कूट-छानकर मिश्री या बूरा बराबर वज़न में मिलायें और आधा सेर गाय के दूध के साथ 5 से 10 ग्राम तक दें। शीघ्रपतन से आई मर्दाना कमजोरी के लिए उत्तम योग है।

6. सालब मिश्री, मस्तगी रूमी, लाख झरबेरी। समभाग लेकर पीसकर गूलर के दूध की सहायता से चने के बराबर गोलियां बना लें। 1 गोली प्रतिदिन रात्रि को प्रयोग करें।

7. जायफल, जावित्री, मस्तगी, केसर, गुग्गल, नागेसर, मोचरस, छालिया, छोटी इलायची, दाना खुरासानी अजवायन, तबाशीर। सबको समान मात्रा में कूट-छानकर चने के आकार की गोलियां बना लें। प्रतिदिन 1 गोली प्रयोग करें।

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8. सुहागा चैकिया 2 ग्राम, काफूर 2 ग्राम, लौंग 12 ग्राम, काली मिर्च 12 ग्राम। चूर्ण पानी में घोटकर जंगली बेर के आकार की गोलियां बना लें। संभोग से पूर्व 1 गोली पानी में घिसकर लिंग पर लेप करें।

9. 6 ग्राम वज़न का बताशा लेकर उसमें 1 तोल बढ़ वृक्ष क दूध एवं डेढ़ ग्राम अफीम मिलाकर लोहे के हमामदस्ते में 1 घण्टे तक कूटें। तत्पश्चात् उड़द के समान गोलियां बना लें। संभोग से दो घण्टा पूर्व 1 गोली दूध से खायें। स्तम्भन शक्ति उत्पन्न करने के लिए अनुपम भेंट है।

10. लौंग चबाकर उसकी लार शिश्न(सुपारी छोड़कर) पर लगा कर मैथुन करने से समय अधिक लगता है तथा कमज़ोरी कम होती है।

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