Kya Hastmaithun Karna Nuksandayak Hota Hai?

Kya Hastmaithun Karna Nuksandayak Hota Hai?

क्या हस्तमैथुन करना नुकसानदायक होता है?

हस्तमैथुन क्या है?

हस्तमैथुन वह मैथुन है, जिसमें हस्त(हाथ) की सक्रियता से वीर्य या रज का क्षरण होता हो।
जब पुरूष कामातुर हो और संभोग की सुविधा नहीं होती है, तो एकांत की स्थिति में हाथ स्वतः लिंग पर चला जाता है। मनुष्य उसे सहलाने लगता है। लिंग्राग की त्वचा को आगे-पीछे करता है। लिंग में कड़ापन आ जाता है। आनंद में वृद्धि होने लगती है, इस समय अपनी प्रेमिका या पसंद की लड़की अथवा स्त्री के साथ काल्पनिक विभिन्न संभोग मुद्रा का ध्यान करने में डूब जाता है।
इसी बीच एक क्षण ऐसा आता है, जब वीर्य का स्खलन हो जाता है और लिंग की उत्तेजना समाप्त हो जाता है। पुरूष ऐसा करने के बाद सोचता है कि आगे से पुनः ऐसा कार्य नहीं करेगा। फिर आगे एकांत मिलने पर या किसी लड़की या युवती के प्रति आकर्षण होने पर वही ‘ढाक के तीन पात’ मात्र आज ऐसा कर लेता हूं, कल से ऐसा नहीं करूंगा। यही क्रम चलता रहता है।

हस्तमैथुन क्यों करते हैं?

जब लड़की को मासिक धर्म आरम्भ होता है और लड़के को जब एक बार स्वप्नदोष होता है, तो उसके बाद से उनमें रति सुख की चाह का बीजारोपण हो जाता है। अपने से विपरीत लिंग की ओर(लड़के को लड़की की और लड़की को लड़के की ओर) आकर्षण पैदा होने लगता है। वे रति सुख आदि की चर्चा में रूचि लेने लगते हैं। आकर्षण पैदा होने पर विपरीत लिंग वालों से मित्रता हो जाती है। फिर मन मिलने के बाद शरीर मिलने लगते हैं। फिर इसकी चाह बढ़ती जाती है। एक-दूसरे से दूर रहने पर, मिलने में बाधा होने पर वे हस्तमैथुन का सहारा लेने लगते हैं। जिनके कोई विपरीत लिंगी मित्र होते ही नहीं हैं, उनके लिए मात्र एक यही विकल्प रह जाता है। भारत जैसे गर्म देशों में लड़कियां 13 से 15 वर्ष की आयु में रजस्वला हो जाती है। लड़के 18 वर्ष तक पहुंचते-पहुंचते वीर्य स्खलन या स्वप्नदोष के शिकार हो जाते हैं।
यही कारण है कि देर-सवेर कम या अधिक इसका शिकार कभी न कभी 100 में से 98 प्रतिशत लोग हो जाते हैं। सजग, स्वास्थ्य के प्रति सावधान लोग यदि ऐसा नहीं भी करते, यथासंभव सावधानी बरतते हैं, तो स्वप्नदोष होने लगता है।

हस्तमैथुन करें या नहीं?

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यदि पत्नी से लंबे समय के लिए या लंबे समय तक दूर रह रहे हों या शादी न होने के कारण या किसी अन्य कारण से संभोग से दूर रहने को बाध्य हों। संभोगरत नहीं होने से बराबर स्वप्नदोष हो जाता हो, तो कभी-कभी या महीने में 1-2 बार हस्तचलन कर लेना स्वास्थ्य के लिए इतना बुरा नहीं है, जितना प्राचीन मतों के अनुसार बतलाया गया है।
हां, इसमें भी उचित नहीं है, यदि महीने में 1-2 बार से अधिक हस्तक्रिया करना प्रारम्भ कर दिया जाये, तो दुष्परिणाम भुगतना पड़ता है जैसे-

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1. जननेन्द्रिय स्त्री को हो या पुरूष की, अति संवेदनशील होती हैं। बार-बार के घर्षण(मर्दन) से यह संवेदनशीलता नष्ट हो जाती है। परिणामतः प्राकृतिक संभोग में भी आनंद नहीं आता है। लिंग प्रवेश से भी स्त्री आनंद का अनुभव नहीं करती है। धीरे-धीरे संभोग से विरक्ति हो जाती है। ऐसी स्त्रियों को शीत स्वभाव या ठंडा पड़ जाना भी कहते हैं, जिनमें संभोग की इच्छा जागती ही नहीं है।

2. पुरूष भी इसके शिकार हो जाते हैं, जिनमें अधिक घषर्ण(मर्दन) से संवेदनशीलता के अभाव में लिंग मंे उत्तेजना नहीं आती है, जिसके कारण संभोग में असफल रहने लगते हैं।

3. इसकी आदत पड़ जाने से अति की ओर कदम बढ़ने लगता है। परिणामस्वरूप स्त्री हो या पुरूष अनेक रोगों के शिकार हो जाते हैं जैसे-

लड़कियों में रोगी की उत्पत्ति-

1. धीरे-धीरे के प्रति वितृष्णा(उपेक्षा)

2. मासिकस्राव में गड़बड़ी होना।

3. हिस्टीरिया का शिकार होना।

4. स्तनों का ठीक से नहीं उभरना।

5. गर्भाशय एवं डिम्बाशय में विकृति होना।

6. गर्भाधान की क्षमता कम हो जाना।

7. चेहरा कांतिहीन होना।

लड़कों में रोगों की उत्पत्ति-

1. धीरे-धीरे वास्तविक संभोग से विरक्ति।

2. जननेन्द्रिय की संवेदनशीलता का ह्यस।

3. संभोग क्षमता का कम या न होना।

4. वीर्य पतला हो जाने से स्वप्नदोष, वीर्य प्रमेह आदि होना।

5. स्मरण शक्ति का अभाव एवं हीनभावना से ग्रस्त होना।

6. मानसिक तनाव में क्रमशः वृद्धि।

7. कम आयु या युवावस्था में ही वृद्ध लगना।

8. पाचन संस्थान में गड़बड़ी हो जाना।

Kya Hastmaithun Karna Nuksandayak Hota Hai?

इनके अतिरिक्त लिंगेन्द्रिय के मूल में तीन बड़ी नसों का संगम होता है-

1. उदिभजन(Nerves of Organic Life)

2. बुद्धि विषयक नसें(Nerves of Intellectual Life)

3. मनोविकार(Nerves of Animal Life)
इनमें बुद्धि विषयक नसों एवं मनोविकार का पारस्परिक गहरा संबंध होता है। हस्तमैथुन के दुष्प्रभाव से ये नसें कमजोर हो जाती है। इसके परिणाम स्पष्ट है।

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