Kya Aap Bhi To Nahi Karti Hai Hastmaithun?

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क्या आप भी तो नहीं करती हैं हस्तमैथुन?

सेक्स देखा जाये तो स्त्री और पुरूष दोनों की शारीरिक और मानसिक जरूरत है। दोनों ही एक निश्चित आयु अवस्था में इसके भूखे हो जाते हैं। दोनों का ही मन सेक्स की ओर आकर्षित होने लगता है। विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण होना यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।

फिर जब सेक्स की जरूरत के लिए पुरूष के पास कोई स्त्री, पार्टनर या साधन नहीं होता है, तो इस स्थिति में वह पुरूष, हस्तमैथुन के द्वारा अपनी कामपिपास को शांत कर लेता है। इसी प्रकार की स्थिति स्त्री के साथ होती है। वह भी पुरूष की पार्टनर के उपलब्ध न होने पर हस्तमैथुन के द्वारा अपनी पिपास को शांत कर लेती है। मगर स्त्री और पुरूष दोनों के हस्तक्रिया में असमानता हो सकती है या फिर होती है।

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हस्तमैथुन एक स्वभाविक प्रक्रिया है। यदि हस्तचलन संतुलित रूप से किया जाये, तो यह नुकसानदायक नहीं होता। इसके शारीरिक और मानिसक लाभ भी होते हैं। किन्तु बहुत ज्यादा मात्रा में हस्तक्रिया करने से यह काफी नुकसानदायक भी हो सकता है।

यहां हम बात कर रहे हैं स्त्रियों द्वारा किये जाने वाले हस्तचलन की। किशोरावस्था में स्त्रियां अमूमन अपने योनि के आस-पास के हिस्से पर मालिश द्वारा हस्तक्रिया करती हैं।

यौन स्वास्थ्य और व्यवहार के राष्ट्रीय सर्वेक्षण अनुसार 14 से लेकर 17 वर्ष की आयु के किशोरों में से, 48 प्रतिशत स्त्रियों और 73 प्रतिशत पुरूषों ने हस्तमैथुन किया है। इसके अलावा 25 से लेकर 29 वर्ष की आयु के लोगों में से करीब 85 प्रतिशत स्त्रियों और 94 प्रतिशत पुरूष ने हस्तचलन किया है।

स्त्रियों को हस्तमैथुन से हो सकने वाली परेशानियां-

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भविष्य में करना पड़ सकता है परेशानी का सामना :

ऐसी स्त्रियां जिन्हें हस्तचलन की लत पड़ चुकी हो, उन्हें आगे चलकर अपनी शादीशुदा जिदंगी में बहुत-सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्त्रियां संभोग के दौरान अपने पति के साथ खुलकर संभोग का आनंद नहीं ले पातीं या फिर यूं कह लो कि उन्हें आनंद ही नहीं आता, क्योंकि उन्हें हस्तचलन की आदत पड़ चुकी होती है। ऐसे में सेक्स के दौरान पति की लैंगिक उन्हें यौनिक आनंद नहीं दे पाती और उनकी सेक्स लाईफ डांवाडोल हो जाती है।

स्वभाव में आ जाता है चिड़चिड़ापन :

जिन महिलाओं को बहुत ज्यादा हस्तक्रिया की लत हो जाती है। या फिर यूं कह लें कि हस्तानंद उनकी जिंदगी में दैनिकचर्या का हिस्सा बन जाता है, ऐसी महिलाओं को अगर हस्तानंद करने की जगह या एकांतपन न मिले या किसी भी अन्य कारणों से वह हस्तक्रिया नहीं कर पाती हैं, तो उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आना शुरू हो जाता है। जरा-जरा सी बात पर वह आक्रामक हो जाती हैं और तनाव में रहने लगती हैं।

हीमेच्यूरिया रोग होने की संभावना :

यौनिक पिपासा शांत करने के उद्देश्य से हस्तानंद की आदि स्त्रियों को हीमेच्यूरिया नामक रोग होने की संभावना भी बनी रहती है, जोकि गंभीर समस्या हो सकती है। यह ऐसी बीमारी होती है, कि इसमें स्त्रियों को यूरिन में ब्लड आने लगता है।

मासिक चक्र में होती है परेशानी :

रेगुलर तौर पर यौनिक हस्तक्रिया करने वाली स्त्रियों में पीरियड, मासिक धर्म व मासिक चक्र जैसी दिक्कतों के साथ ही यौनांग में सूखापन भी परेशान करने लगता है।

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हो सकता है नुकसान :

स्त्रियों को यौनिक हस्तानंद के दौरान कुछ सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए। इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि जननांग क्षेत्र को बलपूर्वक बहुत जोर से रगड़ना या सहलाना नहीं चाहिए, जिससे कि उन्हें कोई शारीरिक नुकसान हो। धीरे से और नियंत्रण रखते हुए सहलाने या उत्तेजना से इन हिस्सों को कोई नुकसान नहीं होगा।

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